08.15.07
लड़की से गई ‘दंबगई’
ख़बरिया के हाथ ख़बर लगने में देर हो गई लेकिन जो तपास हुई उसके चलते ख़बर के अंदर की ख़बर हाथ लग गई। हुआ यूं है कि पिछले दिनों एक हिन्दी ख़बरिया चैनल से एक दिग्गज एंकर को निकाले जाने की ख़बर किसी ब्लॉगिए ने छाप दी। जल्दबाज़ी का चस्का ख़बरिया चैनलों का दिया हुआ है। ब्लॉगिओं की अघोषित लड़ाई भी चैनलों के साथ चल रही है लिहाज़ा अच्छाई-बुराई का आदान-प्रदान होता ही है। भैये.. ख़बर ब्लॉग पर इस तरह छपी कि एक चैनल के एक एंकर को वहां से हटा दिया गया। दरअसल, बाद में कन्फ़र्म हुआ कि उस एंकर की दंबगई गई यानी पर कतर दिए गए।
ख़बरिया से आप कहोगे कि ये तो पुरानी बात है.. नया क्या है तो भैये ख़बरिया को यह पता चला है कि मामला कास्टिंग काउच का था। दरअसल, इस शख़्स के वूमनाइज़र होने की बात हवा में कई महीनों से तैरती रही है। जब से कमान संभाली थी कई का भविष्य संवार दिया तो कुछ को किनारे कर दिया। ताज़ा घटना यूं थी कि चैनल के पितामह को एक लड़की की शिकायत आई कि ये शख़्स इन्हें भी ऑफ़र किए थे, अब परेशान कर रहे हैं। अब क्या था, पितामह एक तो वैसे ही गिरते चैनल ग्राफ़ से परेशान है। ऊपर से जिनके हाथों में कमान दे रखी है उनकी करतूतों ने बंटाधार कर रखा है। उठाया की-बोर्ड और धड़ल्ले से टकाटक लिखा कि अपना `मुक़ाबला` ख़ुद करो और बाक़िया औरों को खेलने दो। यह मेल संस्थान में सभी को भेजी गई थी।
पाठकों को शायद यह पता नहीं होगा कि पिछले दिनों `सबसे तेज़` होने का दावा करने वाले एक ख़बरिया चैनल के आउटपुट के तीसमार ख़ां को भी इसी वजह से संस्थान से निकाल बाहर किया गया था। ये तुर्रमखां अब आने वाले नए चैनल में ऊंची पोस्ट पर नियुक्त किए गए हैं।
चलते चलते –
इंडिया टीवी छोड़कर जाने वाले रिपोर्टरों से कारण पूछे जाने पर पता चला है कि वे सभी नाग-नागिनों से परेशान थे। चैनल के स्टूडियो में नाग-नागिन ने बसेरा बना लिया है और सुबह से रात तक रिपोर्टरों को फुफकारते रहते थे। कुछ नाग तो रजत शर्मा के पास ही कुंडली मारकर बैठे हैं। कुछ चिपके है तो कुछ स्टार से आए हैं। ज़्यादातर रिपोर्टरों ने सुधीर चौधरी का लाइव इंडिया चैनल ज्वाइन कर लिया है। सुधीर चौधरी छह महीने पहले तक खुद इंडिया टीवी मे थे। सुधीर इन दिनों रजत शर्मा बनने की तर्ज पर समाचारों का लीड आउट (पुछल्ला, उपसंहार) देना नहीं भूलते।
एक और ख़बर-
सोनिया गांधी जल्द ही दिल्ली से जयहिंद टीवी का लोकार्पण करने वाली है। दक्षिण भारत में राजनीतिक पार्टियों के कई चैनल है। जयहिंद टीवी कॉग्रेस का मलयाली चैनल होगा जो कम्युनिस्ट चैनल कैराली टीवी को टक्कर देगा। ख़बरिया सोच रहा है कि उत्तर भारत में ऐसा ट्रेंड कब आएगा जब पार्टियों के अपने चैनल हिन्दी मे होंगे। अब भी है..लेकिन खुले तौर पर पीठ पर ठप्पा लगवाने में शरम आती है।
पाठक ही बताएं कि कौन-सा चैनल किसके राग गाता है।
Amit said,
August 15, 2007 at 7:35 pm
खूब!
वैसे नाग नागिनों को खुला छोड़ रखा है क्या जो रिपोर्टरों को टेन्शन है?
Editindia said,
August 15, 2007 at 10:04 pm
Good work buddies. Nice to see a media watchdog in Hindi.
नाम दि्या तो नौकरी जायेगी said,
August 16, 2007 at 4:30 am
भई लड़कीबाज तो ये जो सब से लड़ाइयां करने वाला वहां का चिट्ठाकार है वो भी कम नहीं है।
श्रीश शर्मा said,
August 16, 2007 at 6:36 am
मजेदार खबरें दी
Michal said,
August 16, 2007 at 9:09 am
खबर बडी दिलचस्प है दादा कहा से निकाली कुछ और पत्ते खोलो न भाई