09.18.07
ख़बरदार या झंडाबरदार
क्या कहे भई… पिछली बार जब विनोद दुआ का जिकर हुआ था तो लोगों को बुरा लगा कि ऐसी महान विभूति के लिए इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल मानसिक दिवालियापन है। हम भी सोचे यार कि गलती हो गई। किसी दिन सामना हो गया तो हम ही झेंप जाएंगे कि ऐसा हमने क्यों किया। अब जो हुआ सो हुआ। हो सकता है कि ऊपरवाला ही हमरे मुंह से उनके लिए उल्टा-सीधा बुलवाना चाह रहा हो। जो होता है अच्छा होता है। हम मिलकर माफी मांग लेंगे। खामाखां बीच में कोई गुरू-घंटाली दिखाने की कुचेष्टा ना करे तो ही अच्छा। नौकरी थोड़ी छीन लेंगे। बड़े लोग छोटी बातों का बुरा नहीं माना करते।
अपनी खबर नहीं है इस बार.. इस बार दुआ साहब की एक बात लेकर हम आ गए हैं। हुआ यों कि कल विनोद दुआ जी ने खबरदार में कहा कि करुणानिधि के बयान पर बीजेपी वाले कुछ नहीं बोले। और इस पर पोल भी चला लिया। आपको तो पता है पोल का तीसरा विकल्प दुआ साहब के मन का होता है। जिसे प्रोग्राम के अंत में सबसे ज्यादा वोट मिल जाते हैं और हो जाता है फैसला राष्ट्रीय नाड़ी का। नाड़ी धड़क रही है दुआ साहब की नाड़ी के साथ.. कदमताल मिलाते हुए।
भई, हमने माना कि बीजेपी वाले निरा मूर्ख है। खुरापाती हैं। राम के नाम पर देश की धर्मनिरपेक्षता की लुटिया डुबाने का मंसूबा पाले हुए हैं लेकिन भैये खबरदार तैयार करते समय ये तो देख लिया करो कि पीटीआई यूएनआई आईएएनएस वगैरह वगैरह क्या कह रहे हैं। हुआ यह कि करुणानिधि ने बयान दिया.. कुछ लोग कहते हैं कि 17 लाख साल पहले एक व्यक्ति हुआ जिसका नाम राम था। उनके द्वारा निर्मित सेतु को नहीं छुएं, कौन हैं यह राम, किस इंजीनियरिंग कालेज से उन्होंने पढ़ाई की, क्या इसका कोई सबूत है? कुछ भेड़िए द्रविड़ आंदोलन को खत्म करना चाहते हैं।
कल जब अन्नादुरै की 99वे जन्मदिवस समारोह वाला यह बयान आया। उसके कुछ ही घंटों में बीजेपी की तरफ़ से बयान आ चुका था। प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद और मुरली मनोहर के बयान रात तक पीटीआई पर भी आ चुके थे। अरे भई.. इतनी जल्दी क्या थी दुआ साहब को।
दुआ साहब ही क्या एनडीटीवी वालों की आदत है कि वे बीजेपी के साथ छुआछूत का व्यवहार करते रहते हैं। भई सीधा उसूल अपनाओ.. रिपोर्ट निष्पक्षता से लिखो… संपादकीय में अपना ज्ञान बखारो। यह संतुलन साधा करो- खबरिया छोटा मुंह बड़ी बात क्या कहे। मान भी लें कि उस वक्त बीजेपी का बयान नहीं आया था..तो भी फुनवा घुमा लेते और ले लेते बयान। कभी कभी तो लगता है कि ग़ैरबीजेपीवाद के झंडाबरदार बन जाते हैं खबरदार वाले। आदत सुधारो दद्दा इस कदर दुश्मनी ठीक नही लगती। या हमहुं साहिर का शेर मारे.. पीकर?
09.12.07
सहारा प्रणाम को नमस्ते
ख़बर है कि ‘जिस तर्ज पर’, ‘उस तर्ज पर’ तर्जबंदी करने वाले दढ़ियल पुण्य प्रसून वाजपेयी जो कि अब तक ”आजतक” को अपनी सेवाएं दे रहे थे- ने चैनल को अलविदा कहते हुए राष्ट्रीय सहारा चैनल ज्वाइन किया है.. ये तो आपको पहले ही किसी न किसी ने बता दिया होगा। टीवी जनर्लिज़्म के एंकर-रिपोर्टर समेत तमाम कर्मचारी तराज़ू के मेढक होते हैं। कौन-कब-कहां ज्वाइन कर लेता है- ये वो खुद नहीं जानता। खुद बेचारों को बाद में भान होता है तो कहते हैं- ‘ये कहां फंस गए यार’। वैसे ये तो परमसत्य है कि चैनल वाले जितनी नौकरी छोड़ते हैं तनख्वाह में गुणात्मक बढ़ोतरी होती जाती है। यदि आप चैनल में नौकरी कर रहे हैं तो फ़ौरन स्वामीभक्ति छोड़ नोटभक्ति में रम जाइए, फिर ना कहना कि ख़बरिया ने बताया नहीं।
कुछ ही हफ्तों पहले पुण्य प्रसून त्रिवेणी चैनल ज्वाइन कर चुके थे। चार दिन में ही वहां के हेड रामकृपाल जी से मतभेद हो गए और पुण्य प्रसून बाजपेयी वापस ‘आजतक’ चले गए। विदित हो कि त्रिवेणी चैनल अभी लॉच नहीं हुआ है। आप कहोगे कि रामकृपाल जी और बाजपेयी जी के बीच लेफ्टिस्ट और राइटिस्ट वाला झगड़ा हुआ होगा। ना ना.. ऐसा अब थोड़ी होता है। कौन राइटिस्ट और कौन लेफ्टिस्ट अपने जॉब को लात मारेगा? उदारीकरण में झगड़े तो अब तेरी कार का मॉडल, मेरे मॉडल से नया कैसे-वाली तर्ज पर होता है भैये। नोट करो ”ज्ञान बांटने से बढ़ता है..” ये पहले की सूक्ति थी। अब कहा जाता है- ”औरों को ज्ञान बांटने से तनख्वाह कम हो जाती है”
रामकृपाल जी ने पत्रकारिता की शुरूआत कानपुर से 1971 में अपनी टूटी साइकिल पर शुरू की थी। आज त्रिवेणी चैनल की कृपा रामकृपाल जी पर बरस रही है सो वे चालीस लाख की कार में बैठकर रिपोर्टिंग कर रहे हैं। उधर, वाजपेयी जी हर महीने आठ लाख रुपए की तनख्वाह पर सहारा में गए हैं। सहारा श्री जिन दिनों दिल्ली प्रवास पर थे और वे चैनल के गिरते ग्राफ़ से परेशान हैं। राष्ट्रीय सहारा न्यूज़ चैनल दूरदर्शन के बाद ऐसा चैनल है जिसके पास सबसे ज़्यादा रिसोर्सेस हैं लेकिन सबसे आलसी प्राणी यहीं मिल जाएंगे। चैनल का इन मायनों में सरकारीकरण हो चुका है। सहारा श्री कुछ नयी नियुक्तियो के सिलसिले में दिल्ली आए हुए थे औऱ चैनल को टॉप टू बॉटम चकमक कर देने की चाह रखते हैं। संजय बरागटा ने भी सहारा ज्वाइन कर लिया है.
सहारा प्रणाम को नमस्ते करना होगाः पुण्य प्रसून ने आते सहारा ग्रुप की हेल हिटलर तर्ज वाली परंपरा – सहारा प्रणाम- को तिलांजली देने का फ़रमान जारी कर दिया है। कहा जा रहा है कि पूरा चैनल ही नए कलेवर में जब रंग जाएगा तभी पुण्य परदे पर दिखाई देंगे। छिंदवाड़ा, नागपुर के क़स्बाई इलाक़ो में अस्सी के दशक की पत्रकारिता करने वाले पुण्य अब दिल्ली के नामी पत्रकार हो गए हैं। चैनल वाले नामी एंकरों की तर्ज पर उन्हें सहारा में हर महीने सात लाख रुपया दिया जाएगा जो अब तक की सबसे बड़ी रकम मानी जा रही है।
एक और ख़बर - दिवंगत उदयन शर्मा के पुत्र कार्तिकेय शर्मा जो कि अब तक आजतक में न्यूज़ एंकर थे, ने बीएजी चैनल में छलांग लगा दी है। अजय सिंह जो स्टार न्यूज़ में नज़र आते थे ने भी सहारा चैनल ज्वाइन कर लिया है। सईद अंसारी स्टार से बीएजी आ गए हैं। ख़बर यह भी है कि आज तक की श्वेता सिंह जो हाल ही में चक दे इंडिया में दिखाई थीं, ने भी बीएजी में छलांग लगा दी है। नए रिपोर्टरों को आजतक के दफ़्तर का चक्कर रोज़ लगाते रहना चाहिए.. अच्छा अवसर है। बस इतना ध्यान रहे.. प्रतिभा नहीं पौवा लगाना पड़ेगा।