09.12.07
सहारा प्रणाम को नमस्ते
ख़बर है कि ‘जिस तर्ज पर’, ‘उस तर्ज पर’ तर्जबंदी करने वाले दढ़ियल पुण्य प्रसून वाजपेयी जो कि अब तक ”आजतक” को अपनी सेवाएं दे रहे थे- ने चैनल को अलविदा कहते हुए राष्ट्रीय सहारा चैनल ज्वाइन किया है.. ये तो आपको पहले ही किसी न किसी ने बता दिया होगा। टीवी जनर्लिज़्म के एंकर-रिपोर्टर समेत तमाम कर्मचारी तराज़ू के मेढक होते हैं। कौन-कब-कहां ज्वाइन कर लेता है- ये वो खुद नहीं जानता। खुद बेचारों को बाद में भान होता है तो कहते हैं- ‘ये कहां फंस गए यार’। वैसे ये तो परमसत्य है कि चैनल वाले जितनी नौकरी छोड़ते हैं तनख्वाह में गुणात्मक बढ़ोतरी होती जाती है। यदि आप चैनल में नौकरी कर रहे हैं तो फ़ौरन स्वामीभक्ति छोड़ नोटभक्ति में रम जाइए, फिर ना कहना कि ख़बरिया ने बताया नहीं।
कुछ ही हफ्तों पहले पुण्य प्रसून त्रिवेणी चैनल ज्वाइन कर चुके थे। चार दिन में ही वहां के हेड रामकृपाल जी से मतभेद हो गए और पुण्य प्रसून बाजपेयी वापस ‘आजतक’ चले गए। विदित हो कि त्रिवेणी चैनल अभी लॉच नहीं हुआ है। आप कहोगे कि रामकृपाल जी और बाजपेयी जी के बीच लेफ्टिस्ट और राइटिस्ट वाला झगड़ा हुआ होगा। ना ना.. ऐसा अब थोड़ी होता है। कौन राइटिस्ट और कौन लेफ्टिस्ट अपने जॉब को लात मारेगा? उदारीकरण में झगड़े तो अब तेरी कार का मॉडल, मेरे मॉडल से नया कैसे-वाली तर्ज पर होता है भैये। नोट करो ”ज्ञान बांटने से बढ़ता है..” ये पहले की सूक्ति थी। अब कहा जाता है- ”औरों को ज्ञान बांटने से तनख्वाह कम हो जाती है”
रामकृपाल जी ने पत्रकारिता की शुरूआत कानपुर से 1971 में अपनी टूटी साइकिल पर शुरू की थी। आज त्रिवेणी चैनल की कृपा रामकृपाल जी पर बरस रही है सो वे चालीस लाख की कार में बैठकर रिपोर्टिंग कर रहे हैं। उधर, वाजपेयी जी हर महीने आठ लाख रुपए की तनख्वाह पर सहारा में गए हैं। सहारा श्री जिन दिनों दिल्ली प्रवास पर थे और वे चैनल के गिरते ग्राफ़ से परेशान हैं। राष्ट्रीय सहारा न्यूज़ चैनल दूरदर्शन के बाद ऐसा चैनल है जिसके पास सबसे ज़्यादा रिसोर्सेस हैं लेकिन सबसे आलसी प्राणी यहीं मिल जाएंगे। चैनल का इन मायनों में सरकारीकरण हो चुका है। सहारा श्री कुछ नयी नियुक्तियो के सिलसिले में दिल्ली आए हुए थे औऱ चैनल को टॉप टू बॉटम चकमक कर देने की चाह रखते हैं। संजय बरागटा ने भी सहारा ज्वाइन कर लिया है.
सहारा प्रणाम को नमस्ते करना होगाः पुण्य प्रसून ने आते सहारा ग्रुप की हेल हिटलर तर्ज वाली परंपरा – सहारा प्रणाम- को तिलांजली देने का फ़रमान जारी कर दिया है। कहा जा रहा है कि पूरा चैनल ही नए कलेवर में जब रंग जाएगा तभी पुण्य परदे पर दिखाई देंगे। छिंदवाड़ा, नागपुर के क़स्बाई इलाक़ो में अस्सी के दशक की पत्रकारिता करने वाले पुण्य अब दिल्ली के नामी पत्रकार हो गए हैं। चैनल वाले नामी एंकरों की तर्ज पर उन्हें सहारा में हर महीने सात लाख रुपया दिया जाएगा जो अब तक की सबसे बड़ी रकम मानी जा रही है।
एक और ख़बर - दिवंगत उदयन शर्मा के पुत्र कार्तिकेय शर्मा जो कि अब तक आजतक में न्यूज़ एंकर थे, ने बीएजी चैनल में छलांग लगा दी है। अजय सिंह जो स्टार न्यूज़ में नज़र आते थे ने भी सहारा चैनल ज्वाइन कर लिया है। सईद अंसारी स्टार से बीएजी आ गए हैं। ख़बर यह भी है कि आज तक की श्वेता सिंह जो हाल ही में चक दे इंडिया में दिखाई थीं, ने भी बीएजी में छलांग लगा दी है। नए रिपोर्टरों को आजतक के दफ़्तर का चक्कर रोज़ लगाते रहना चाहिए.. अच्छा अवसर है। बस इतना ध्यान रहे.. प्रतिभा नहीं पौवा लगाना पड़ेगा।
Shastri JC Philip said,
September 12, 2007 at 5:08 pm
“यदि आप चैनल में नौकरी कर रहे हैं तो फ़ौरन स्वामीभक्ति छोड़ नोटभक्ति में रम जाइए, फिर ना कहना कि ख़बरिया ने बताया नहीं।”
सटीक बात कही है आप ने — शास्त्री जे सी फिलिप
मेरा स्वप्न: सन 2010 तक 50,000 हिन्दी चिट्ठाकार एवं,
2020 में 50 लाख, एवं 2025 मे एक करोड हिन्दी चिट्ठाकार!!
mamta said,
September 12, 2007 at 5:09 pm
देखना ये है कि कितने दिन या साल सहारा मे काम करते है।
Basant Arya said,
September 12, 2007 at 8:36 pm
वाह साहब आपने तो अन्दर की बात बता दी
yunus said,
September 13, 2007 at 2:40 am
बाप रे
इतनी कूदा फांदी
deepanjali said,
September 26, 2007 at 10:35 am
आपका ब्लोग बहुत अच्छा लगा.
ऎसेही लिखेते रहिये.
क्यों न आप अपना ब्लोग ब्लोगअड्डा में शामिल कर के अपने विचार ऒंर लोगों तक पहुंचाते.
जो हमे अच्छा लगे.
वो सबको पता चले.
ऎसा छोटासा प्रयास है.
हमारे इस प्रयास में.
आप भी शामिल हो जाइयॆ.
एक बार ब्लोग अड्डा में आके देखिये.
FARZI said,
September 27, 2007 at 8:11 am
miya apki khabre sachmuch hi jordaar hai. Magar kuch such hamare pass bhi hai in khabria channelo ke.