About
खबरिया का जन्म उस वक्त ही गया था, जब हम नवयुवक पत्रकारों ने अपने अपने मीडिया हाउस मे हो रही पत्रकारिता का कत्ल अपने आंखो के सामने होते देखा। लेकिन वो कहते है ना पेट की भूख बहुत बड़ी भूख होती है, हमने भी इस नौकरी से पहले फाके देखे थे। उन फाकों की याद करके ही हम बेबस होकर पत्रकारिता को नेताओं के आगे बिकता देखकर भी चुप रहे। हम सभी साथी आपस मे मिल बैठकर बाते करते, कहानी लगभग वही थी, बस पात्र और जगह बदल जाते थे। फिर एक दिन हम लोगों ने हिन्दी ब्लॉगरों के ब्लॉग्स देखे, तो लगा शायद हम अपनी बात कहने का मंच मिल गया। इस ब्लॉग को बनाने का उद्देश्य किसी को भी बदनाम करना नही है, और ना ही किसी प्रकार की सनसनी फैलाना है। बल्कि हम तो सिस्टम मे फैली बुराई को दूर करना चाहते है, लेकिन शायद खुल कर आगे आने की हिम्मत हममे से किसी की भी नही है, फिलहाल तो कोई सम्भावना नही। लेकिन दिल है कि चुप नही बैठना चाहता, शायद यही इस ब्लॉग के जन्म का कारण है।
पत्रकारिता के पेश मे आने से पहले हमने ढेर सारे सपने देखे थे, हजारो उम्मीदें थी। लेकिन उन उम्मीदों और सपनों को झटका लगा जब हमने मीडिया हाउस के अन्दर फैले सिस्टम को देखा। हमने देखा कैसे टीवी पर दिखने वाले सो काल्ड पत्रकार, नेताओं के आगे पीछे घूमते है, कैसे अगले दिन की ब्रेकिंग न्यूज, किसी बार मे डिसाइड होती है। और कैसे ये सच दिखाने वाले, झूठ के हाथों की कठपुतली बन कर रह जाते है। इन सभी पर हम बात करेंगे, लेकिन एक एक करके।इसमें आपका सहयोग भी आवश्यक होगा। आपका नाम पता गुप्त रखे जाने की हमारी गारंटी है। चाहें तो छुपा रुस्तम बनकर भी जानकारियां भेजी जा सकती हैं।
सबसे पहले तो हम सभी मीडिया हाउस का परिचय देंगे, अपने तरीके से। उसके बाद ही हम एक एक खबर पर आएंगे। हम एक बार फिर साफ कर देना चाहते है कि हमारा उद्देश्य व्यवसायिक ना होकर, सिर्फ़ देश के सामने सच्ची पत्रकारिता का उदाहरण पेश करना है और ऐसी ही लोगों को प्रोत्साहित करना है। हम उन लोगों को आइना दिखाने की कोशिश कर रहे हैं जो पत्रकारिता के नाम पर दुनियाभर को और राजनीतिज्ञों को आइना दिखाते फिरते हैं हम इसमे सफ़ल होते है या मीडिया वाले हमारी आवाज दबा देते है, इसका फैसला वक्त करेगा। हम तो बस अपनी दिल की बात आपके समक्ष रखने का प्रयास मात्र कर रहे है।
जय हिन्द।
रवि said,
August 29, 2006 at 7:31 am
… फिर एक दिन हम लोगों ने हिन्दी ब्लॉगरों के ब्लॉग्स देखे, तो लगा शायद हम अपनी बात कहने का मंच मिल गया।…
चलिए, इस बहाने हिन्दी ब्लॉग जगत अपने उद्देश्य में सफल तो हुआ!
नाज़िम नक़वी said,
October 23, 2006 at 1:10 pm
बंधू, नमस्कार
क्या बात है… क्या शुरूआत है… मज़ा तो आया लेकिन ये अंदर की बात है इसलिये बताई नहीं जा सकती… बस इतना ही कह सकते हैं कि शुभकामनाएं लीजिये और लगे रहिये मुन्नाभाई की तरह…
एक पाठक
नाज़िम नक़वी
HIndibhashi said,
June 3, 2007 at 4:41 am
हिंदी मे एक नया जालस्थल शुरू हो चुका है| आपसे निवेदन है की उसे देखे और जुड जायें| आपकी प्रतिक्रिया का इंतजार है|
http://www.hindibhashi.com
sonal said,
August 22, 2007 at 5:07 pm
kabhi sahara samay ke bare mai bhi likh lena.khabar mai de dungi……
Pushker said,
September 19, 2007 at 10:43 am
Dear Sir,
Hats off for taking the pants off of the so called media organizations who have taken the responsibility of distorting the facts, promoting superstitions and showing everything except news who are also expert in stretchinig the info beyond time.
Keep it up –
Pushker
FARZI said,
September 27, 2007 at 8:46 am
tv channel vale stringers ki aisi ki taisi kyun karte hai jabki sabse instant spot news vahi dete hai